By 121 News
Chandigarh, Oct.21, 2026:- चंडीगढ़ के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. कृष्ण मोहन कपूर और उनके जापानी सह-लेखकों डॉ. मनाका तागाया और डॉ. कोन्यो अराई को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी–ग्लोबल ओपन की ओर से वर्ष 2026 का 'बेस्ट केस रिपोर्ट–सिल्वर अवॉर्ड' प्रदान किया गया है।
डॉ. कृष्ण मोहन कपूर एक प्लास्टिक सर्जन और चंडीगढ़ एवं मोहाली स्थित एंटीक्लॉक क्लिनिक एंड मेडिस्पा के संस्थापक-निदेशक हैं। उन्होंने चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) से प्लास्टिक सर्जरी में एमसीएच की डिग्री प्राप्त की है। वह एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एपीएसआई) के सदस्य हैं। उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से कॉस्मेटिक सर्जरी और एस्थेटिक मेडिसिन के क्षेत्र में है।
यह सम्मान 16 अक्टूबर को अमेरिका के ह्यूस्टन, टेक्सास में आयोजित 'प्लास्टिक सर्जरी द मीटिंग 2026' के दौरान दिया गया। समारोह में डॉ. मनाका तागाया और डॉ. कोन्यो अराई ने तीनों लेखकों की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया। चंडीगढ़ स्थित एंटीक्लॉक क्लिनिक के डॉ. के.एम. कपूर पहले से तय पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके।
पुरस्कार प्राप्त शोध पत्र 'लेट इंटरवेंशन येट सक्सेसफुल आउटकम विद हाई-डोज पल्स्ड हायलूरोनिडेज फॉर फोरहेड फिलर वैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन' सितंबर 2025 में जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इसमें माथे पर फिलर इंजेक्शन लगवाने के बाद हुई गंभीर समस्या के सफल इलाज का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 35 वर्षीय महिला के माथे पर फिलर इंजेक्शन लगने के बाद त्वचा में खून की सप्लाई प्रभावित हो गई थी। महिला तीन दिन बाद इलाज के लिए पहुंची, लेकिन हायलूरोनिडेज दवा की बार-बार अधिक मात्रा में दी गई खुराक से उसकी त्वचा लगभग पूरी तरह ठीक हो गई और निशान भी बहुत कम रहे। यह केस बताता है कि इलाज में देरी होने के बावजूद अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, ऐसी समस्याओं की समय पर पहचान और तुरंत इलाज बेहद जरूरी है।
भारत और जापान के डॉक्टरों के इस संयुक्त शोध ने कॉस्मेटिक फिलर इंजेक्शन से जुड़ी समस्याओं के इलाज के बारे में मेडिकल जगत को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। जर्नल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रकाशित शोध पत्रों का मूल्यांकन उन्हें पढ़ने वाले लोगों की संख्या, डाउनलोड और ऑनलाइन व्यूज के आधार पर किया गया। साथ ही यह भी ध्यान रखा गया कि प्रत्येक शोध पत्र कितने समय से ऑनलाइन उपलब्ध था। इसके बाद अलग-अलग श्रेणियों में शोध पत्रों की रैंकिंग की गई।
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. के.एम. कपूर ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम की मेहनत, आपसी सहयोग, अनुभव साझा करने और मेडिकल रिसर्च के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से समारोह में शामिल नहीं हो सके, लेकिन अपने जापानी सहयोगियों को ह्यूस्टन में पुरस्कार प्राप्त करते देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई।
डॉ. कपूर ने दोनों सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल करियर की कामना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मान डॉक्टरों को नए शोध करने, इलाज से जुड़े अनुभवों को प्रकाशित करने और मेडिकल साइंस के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
यह सम्मान 16 अक्टूबर को अमेरिका के ह्यूस्टन, टेक्सास में आयोजित 'प्लास्टिक सर्जरी द मीटिंग 2026' के दौरान दिया गया। समारोह में डॉ. मनाका तागाया और डॉ. कोन्यो अराई ने तीनों लेखकों की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया। चंडीगढ़ स्थित एंटीक्लॉक क्लिनिक के डॉ. के.एम. कपूर पहले से तय पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण समारोह में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके।
पुरस्कार प्राप्त शोध पत्र 'लेट इंटरवेंशन येट सक्सेसफुल आउटकम विद हाई-डोज पल्स्ड हायलूरोनिडेज फॉर फोरहेड फिलर वैस्कुलर कॉम्प्लिकेशन' सितंबर 2025 में जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इसमें माथे पर फिलर इंजेक्शन लगवाने के बाद हुई गंभीर समस्या के सफल इलाज का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 35 वर्षीय महिला के माथे पर फिलर इंजेक्शन लगने के बाद त्वचा में खून की सप्लाई प्रभावित हो गई थी। महिला तीन दिन बाद इलाज के लिए पहुंची, लेकिन हायलूरोनिडेज दवा की बार-बार अधिक मात्रा में दी गई खुराक से उसकी त्वचा लगभग पूरी तरह ठीक हो गई और निशान भी बहुत कम रहे। यह केस बताता है कि इलाज में देरी होने के बावजूद अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, ऐसी समस्याओं की समय पर पहचान और तुरंत इलाज बेहद जरूरी है।
भारत और जापान के डॉक्टरों के इस संयुक्त शोध ने कॉस्मेटिक फिलर इंजेक्शन से जुड़ी समस्याओं के इलाज के बारे में मेडिकल जगत को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। जर्नल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रकाशित शोध पत्रों का मूल्यांकन उन्हें पढ़ने वाले लोगों की संख्या, डाउनलोड और ऑनलाइन व्यूज के आधार पर किया गया। साथ ही यह भी ध्यान रखा गया कि प्रत्येक शोध पत्र कितने समय से ऑनलाइन उपलब्ध था। इसके बाद अलग-अलग श्रेणियों में शोध पत्रों की रैंकिंग की गई।
इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. के.एम. कपूर ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम की मेहनत, आपसी सहयोग, अनुभव साझा करने और मेडिकल रिसर्च के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से समारोह में शामिल नहीं हो सके, लेकिन अपने जापानी सहयोगियों को ह्यूस्टन में पुरस्कार प्राप्त करते देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई।
डॉ. कपूर ने दोनों सहयोगियों का धन्यवाद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल करियर की कामना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मान डॉक्टरों को नए शोध करने, इलाज से जुड़े अनुभवों को प्रकाशित करने और मेडिकल साइंस के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
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