Thursday, 5 November 2026
ਪੁਸਤਕ ‘ਚੁਰਾਸੀਨਾਮਾ’ ਦਾ ਹੋਇਆ ਲੋਕ ਅਰਪਣ ਸਮਾਗਮ
Aravali International School Celebrates India's Rich Heritage on Day 2 of ‘Swarnim Bharat’
By 121 News
Panchkula, Nov. 4, 2026:-Aravali International School, DLF Valley, Panchkula, continued its three-day historical and cultural extravaganza, ‘Swarnim Bharat’, with an impressive showcase of India's glorious past. The second day of the celebration featured captivating performances highlighting significant milestones in Indian history and the country's rich cultural and economic heritage.
The presentations brought to life important historical episodes, including the Kalinga War, Emperor Ashoka's transformation from a conqueror into an advocate of peace, and India's flourishing trading heritage. Through engaging theatrical performances, music and dance, students highlighted the values of courage, compassion and peaceful coexistence.
The programme also explored India's economic prosperity and the legacy of its ancient trade routes, showcasing the country's historical achievements in commerce, culture and international exchanges. The performances offered students and audiences an insight into India's contribution to the development of trade and civilisation.
The event received appreciation for its impressive stagecraft, compelling storytelling and students' outstanding performances. It also provided a meaningful learning experience, encouraging students to connect with India's history and understand the values that have shaped its civilisation.
The second day of ‘Swarnim Bharat’ concluded on an inspiring note, instilling a sense of pride among students in India's rich heritage and enduring legacy.
आईफॉरेस्ट ने पराली जलाने के पूरे दायरे पर नज़र रखने के लिए लॉन्च किया ‘फायर वॉच’
By 121 News
Chandigarh, Nov.05, 2026:- खेतों में आग की घटनाओं की गिनती पराली जलाने की पूरी कहानी नहीं बताती। सैटेलाइट जब किसी क्षेत्र के ऊपर से गुज़रता है, तब जो आग सक्रिय नहीं होती, वह उसकी पकड़ में नहीं आती। साथ ही, दर्ज की गई आग की संख्या से यह पता नहीं चलता कि वास्तव में कितनी कृषि भूमि जली है। इन कमियों को दूर करने के लिए इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंट, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आईफॉरेस्ट) ने ‘फायर वॉच’ लॉन्च किया है। यह एक मल्टी-सैटेलाइट डैशबोर्ड है, जिसे फसल अवशेष जलाने की अधिक संपूर्ण तस्वीर पेश करने के लिए तैयार किया गया है।
फायर वॉच तीन प्रमुख पहलुओं पर नज़र रखता है: सक्रिय आग की संख्या और स्थान, दिन का वह समय जब जलाना सबसे तेज़ होता है, और पूरे सीज़न में प्रभावित क्षेत्र। फिलहाल इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं और अगले चरण में अन्य राज्यों को जोड़ने की योजना है।
आईफॉरेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र भूषण ने कहा कि मौजूदा निगरानी ध्रुवीय कक्षा वाले (पोलर-ऑर्बिटिंग) सैटेलाइटों से मिली आग की गिनती पर निर्भर है, जो पराली जलाने की अधूरी तस्वीर देती है। प्रभावी उपाय तैयार करने के लिए हमें केवल यह जानना काफी नहीं है कि कितनी आग दर्ज हुईं, बल्कि यह भी जानना ज़रूरी है कि जलाना कहाँ और कब होता है और कितनी ज़मीन प्रभावित होती है। फायर वॉच इन आँकड़ों को एक साथ लाकर नीति-निर्माताओं और आम जनता तक बेहतर जानकारी पहुँचाता है।
फायर वॉच कैसे काम करता है
अलग-अलग सैटेलाइट समस्या के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं।
मोडिस (एमओडीआईएस) और विर्स (वीआईआईआरएस) सहित ध्रुवीय कक्षा वाले सैटेलाइट सक्रिय आग की पहचान करते हैं और ज़िला स्तर तक उनका वितरण दिखाते हैं। लेकिन चूँकि ये किसी स्थान के ऊपर से केवल निश्चित समय पर गुज़रते हैं, इसलिए कई आग इनकी पकड़ से छूट जाती हैं।
सेविरी (एसईवीआईआरआई) सेंसर से लैस भूस्थिर (जियोस्टेशनरी) सैटेलाइट मीटियोसैट-8 और मीटियोसैट-9 लगभग हर 15 मिनट में अवलोकन उपलब्ध कराते हैं, जिससे उन घंटों की पहचान करने में मदद मिलती है जब पराली जलाने की घटनाएँ चरम पर होती हैं।
इसके बाद उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली सेंटिनल-2 सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए पराली जलाने के सीज़न से पहले और बाद की भूमि की स्थिति की तुलना की जाती है और कुल जले हुए कृषि क्षेत्र का अनुमान लगाया जाता है। ये सभी स्रोत मिलकर केवल आग की गिनती की तुलना में कहीं अधिक संपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं।
फायर वॉच डैशबोर्ड यह जानकारी इंटरैक्टिव नक्शों, चार्ट और फिल्टर के माध्यम से प्रस्तुत करता है, जिससे यह डेटा शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम जनता के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाता है। डैशबोर्ड पर पराली जलाने से जुड़ा एक साप्ताहिक बुलेटिन भी प्रकाशित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बेहतर जानकारी पर आधारित निर्णयों और अधिक लक्षित कार्रवाई को बढ़ावा देना है, ताकि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम किया जा सके और वायु प्रदूषण तथा मिट्टी के स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों को घटाया जा सके।
फायर वॉच का अनावरण वायु गुणवत्ता, कृषि नीति और पराली जलाने के समाधानों पर आयोजित एक वेबिनार में किया गया। इसमें डॉ. चंद्र भूषण; श्री उमेंद्र दत्त, कार्यकारी निदेशक, खेती विरासत; प्रो. सग्निक डे, प्रमुख, सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंसेज़, आईआईटी दिल्ली; निधि जमवाल, संस्थापक संपादक, ऑन एयर, हील और जुगनू; मोहम्मद रफीउद्दीन, प्रोग्राम लीड, सीईईडब्ल्यू; तथा प्रो. प्रभज्योत सिंधु, असिस्टेंट प्रोफेसर, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने भाग लिया।
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