By 121 News
Chandigarh, July 22, 2026:- भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. राकेश रंजन ने प्राचीन कला केन्द्र का विशेष दौरा किया तथा आईसीसीआर छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। यह कार्यक्रम एम.एल. कोसर ऑडिटोरियम, सेक्टर-35, चंडीगढ़ में आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
अपने संवाद के दौरान डॉ. राकेश रंजन ने विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों के समर्पण, अनुशासन एवं भारतीय कला-संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य का अध्ययन कर रहे ये विद्यार्थी विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक विरासत के सशक्त सांस्कृतिक दूत हैं। उन्होंने प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आईसीसीआर छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत विदेशी विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने तथा भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
इस अवसर पर प्राचीन कला केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कोसर ने डॉ. राकेश रंजन को सम्मानित किया। कार्यक्रम में केन्द्र की अतिरिक्त रजिस्ट्रार डॉ. समीरा कोसर तथा आईसीसीआर के छात्रवृत्ति विभाग के निदेशक डॉ. संजय वेदी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संवाद सत्र के उपरांत आईसीसीआर के अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने भारतीय संगीत एवं नृत्य की विविध विधाओं पर आधारित एक भव्य सांस्कृतिक संध्या प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ समुंद्रा द्वारा प्रस्तुत राग यमन की मधुर शास्त्रीय गायन प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात शौरिन ने पारंपरिक 'झूला' की सुमधुर प्रस्तुति देकर सावन ऋतु की मादकता एवं लोक-सौंदर्य को सजीव कर दिया।
नृत्य प्रस्तुतियों की श्रृंखला में गांदझीना एवं नाहियान ने कथक शैली में 'शिव स्तुति' प्रस्तुत कर अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति एवं सशक्त पद-संचालन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके उपरांत रारामुरी ने ओडिसी की 'स्थायी (बटु नृत्य)' प्रस्तुत की। शुद्ध नृत्य पर आधारित इस प्रस्तुति में जटिल लयकारी, उत्कृष्ट अंग-संचालन तथा ओडिशा की प्राचीन मंदिर परंपरा एवं गोटिपुआ शैली से प्रेरित मनोहारी मुद्राओं का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला।
कार्यक्रम का समापन रेवान की ऊर्जावान भांगड़ा प्रस्तुति से हुआ। पंजाब की समृद्ध लोक संस्कृति से ओत-प्रोत इस मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे सभागार में उत्साह का संचार कर दिया।
उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवं दर्शकों ने सभी अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। यह आयोजन एक बार फिर प्राचीन कला केन्द्र की उस सतत प्रतिबद्धता का प्रमाण बना, जिसके माध्यम से संस्थान भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सद्भाव को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
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