Saturday, 27 June 2026

कबीर के विचारों की गूंज से सराबोर हुई साहित्यिक गोष्ठी

By 121 News

Chandigarh, June 27, 2026:-कबीर जयंती महोत्सव के अवसर पर चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पंचकूला इकाई की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी श्रद्धा, भक्ति और साहित्यिक गरिमा के साथ आयोजित की गई। संस्था के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संतोष गर्ग ने की। कार्यक्रम में संत कबीर के अमर दोहों, साखियों और भजनों के माध्यम से उनके जीवन-दर्शन और सामाजिक संदेशों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में संवाद साहित्य मंच के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज, विशिष्ट अतिथि श्रीकांत तथा राष्ट्रीय कवि संगम के संरक्षक रमेश मित्तल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध गायक एवं सृजन संस्था के अध्यक्ष सोमेश गुप्ता की मधुर सरस्वती वंदना से हुआ।  मुख्य वक्ता वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुनीता नैन ने संत कबीर के व्यक्तित्व और उनकी सहज, सरल एवं जनभाषा में रची गई वाणी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में केदार अदवी ट्रस्ट के अध्यक्ष गणेश दत्त, पूर्व ज्वाइंट रजिस्ट्रार हाईकोर्ट कृष्णा गोयल, साहित्य सेवा प्रकाशन के संस्थापक एम.एल. अरोड़ा, राष्ट्रीय कवि संगम मोहाली इकाई के अध्यक्ष रंजन मगौत्रा, कवयित्री सीमा शर्मा, सीमा रानी, हरिंदर सिन्हा सहित अनेक साहित्यकारों और कवियों ने अपनी कविताओं एवं संत कबीर के प्रेरक दोहों के माध्यम से मानवता, सद्भाव और आत्मचिंतन का संदेश दिया।
इस अवसर पर आर.डी. कैले, अवतार सिंह और राहुल चौहान की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का प्रभावी एवं रोचक संचालन महासचिव अनिल शर्मा 'चिंतक' ने संत कबीर की जीवनी और उनके जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए किया।
साहित्यकारों ने कबीर के कालजयी दोहों का भावपूर्ण पाठ किया। प्रेम विज ने "पत्थर पूजे हरि मिले...", डॉ. संतोष गर्ग ने "साईं इतना दीजिए...", हरिंदर सिन्हा ने "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर..." तथा अनिल शर्मा 'चिंतक' ने "काल करे सो आज कर..." जैसे प्रसिद्ध दोहों का वाचन कर श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
अपने संबोधन में डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने संत कबीर को जागरण युग का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनका चिंतन आज भी समाज को सत्य, समरसता और मानवीय मूल्यों की राह दिखाता है। कृष्णा गोयल, सोमेश गुप्ता, आशा रानी, डॉ. सुनीता नैन, रंजन मगौत्रा, सीमा शर्मा और गणेश दत्त ने भी अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से कबीर की शिक्षाओं को वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि संत कबीर के सत्य, प्रेम, समानता और मानवीय मूल्यों के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए साहित्यिक गतिविधियों का यह क्रम निरंतर जारी रहेगा।

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