Thursday, 11 June 2026

बच्चों को नैतिक शिक्षा के साथ साथ ब्रह्मज्ञान की जानकारी भी जरूरी 

By 121 News
Chandigarh, June 11, 2026:-  सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन पवित्र आशीर्वाद से  बाल संत समागम का आयोजन पंचकुला के सेक्टर 9 स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में किया गया। इस अवसर पर बच्चों ने गीत, एक्शन सांग, स्किट, कविता, कव्वाली, स्पीच, इत्यादि प्रस्तुत कर सतगुरु के संदेश को पहुंचाया । वहीं एक स्किट के माध्यम से बाबा गुरुबचन सिंह के संदेश सादा जीवन, नशा  न करने, दहेज लेने व देने पर प्रतिबंध प्रस्तुत किया । इसके साथ साथ सभी पत्रिकाओं को पढ़ने पर जोर दिया गया।

इस अवसर  पर  सतगुरु माता जी का संदेश देने मोहाली से प्रचारक राजन सूरी ने कहा कि बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों द्वारा सतगुरु की शिक्षाओं का बहुत सुंदर प्रस्तुतीकरण किया है। आज सतगुरु माता जी हमें दो तरह की सिखलाई दे रहे हैं। पहली सिखलाई  परिवार व सांसारिक जीवन में सबसे प्यार, मीठा बोलना,सेवाभाव रखना, आलस न करना व बड़ों का सत्कार करना एवं किसी का दिल न दुखाना। बच्चे जो पढ़ाई कर रहे हैं वो दिल लगाकर पूरी आत्मीयता से , लग्न व मेहनत से पढ़ाई करें ।

दूसरी सिखलाई है जिस पर विशेष जोर दिया जा रहा है - वो है ब्रह्मज्ञान। आत्मा का नाता निरंकार प्रभु से  हर पल हर समय जोड़कर रखना। उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि रेगिस्तान में एक ब्रह्मज्ञानी संत हसन हुआ करते थे। वे दिन रात खुदा की इबादत करने थे। लोगों ने उन्हें बुरा भला कहना शुरू किया। वो झोपड़ी छोड़ झील के किनारे चले गए। झील पर देखते हैं एक कुत्ता पानी पीने आता है पर अपना अक्स देखकर भोंकते भौंकते चला जाता है। वही दूसरा कुत्ता आता है वो सीधे झील में छलांग लगाता है और खूब मस्ती करते पानी पीकर चला जाता है। इसी प्रकार हमें भी अपने हर कर्म को करते हुए निराकार में ही आनंदित रहना है।

इसी प्रकार किसी भी फल में बहुत सारे बीज होते हैं परंतु वो भाग्यशाली बीज होता है जिसे माली बीजता है और पौधा बनता है। इसलिए हमें भी अपने आपको भाग्यशाली मानते हुए इस निराकार में संलिप्त होकर जीवन जीना चाहिए। जिनकी प्रीत निरंकार से जुड़ी होती है वे हर परिस्थिति में एकरस रहते हैं। 

इस अवसर पर पंचकुला ब्रांच  के संयोजक एस.के. सोनी ने प्रचारक राजन सूरी एवं पंचकुला के आस पास के क्षेत्र से आए सभी श्रद्धालुओं का अभिवादन किया व बच्चों द्वारा सतगुरु की शिक्षाओं का जो संदेश दिया है, उसे हर कोई अम्ल रूप में अपनाए, ऐसी कामना की।
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