By 121 News
Panchkula, June 20, 2026:- पारस हेल्थ पंचकूला के डॉक्टरों ने एक वर्षीय बच्चे का एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव ब्रेन सर्जरी के माध्यम से सफल इलाज कर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चे को गंभीर हाइड्रोसेफेलस (मस्तिष्क में पानी भरना) की समस्या थी, जिसके कारण उसका सिर असामान्य रूप से बड़ा हो गया था और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा था। जांच और एमआरआई स्कैन में पता चला कि बच्चे को एक्वेडक्टल स्टेनोसिस नामक बीमारी थी। इस स्थिति में मस्तिष्क में बनने वाले सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीऐसएफ) का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे दिमाग में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। परिवार को कई जगहों पर पारंपरिक वीपी शंट सर्जरी कराने की सलाह दी गई थी।
हालांकि, पारस हेल्थ पंचकूला के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी डॉ. गौरव शर्मा ने विस्तृत जांच के बाद बच्चे को एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रिकुलोस्टॉमी प्रक्रिया के लिए उपयुक्त पाया। यह एक आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें मस्तिष्क के भीतर सीएसएफ के प्रवाह के लिए नया रास्ता बनाया जाता है। इससे स्थायी शंट लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
डॉ. शर्मा और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक सर्जरी करते हुए मस्तिष्क के तीसरे वेंट्रिकल में एक छोटा मार्ग बनाया, जिससे जमा हुआ तरल पदार्थ प्राकृतिक रूप से प्रवाहित होने लगा। इस प्रक्रिया ने ब्लॉकेज को दूर कर बच्चे को आजीवन शंट पर निर्भर रहने से बचा लिया।
डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि वर्षों से वीपी शंट हाइड्रोसेफेलस के इलाज का प्रमुख विकल्प रहा है, लेकिन इससे मरीजों को संक्रमण, ब्लॉकेज और बार-बार सर्जरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि चुनिंदा मामलों में इटीवी तकनीक अधिक प्रभावी साबित होती है क्योंकि यह मस्तिष्क के प्राकृतिक सीएसएफ प्रवाह को बहाल करती है और स्थायी इम्प्लांट की जरूरत नहीं पड़ती।
सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वह नियमित फॉलो-अप में है। विशेषज्ञों के अनुसार इटीवी तकनीक शंट फेल होने, संक्रमण और भविष्य में बार-बार सर्जरी की आवश्यकता जैसे जोखिमों को काफी हद तक कम कर देती है।
पारस हेल्थ पंचकुला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि बच्चों में जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, आधुनिक तकनीक और मजबूत क्रिटिकल केयर सुविधाएं बेहद जरूरी होती हैं। उन्होंने बताया कि इस सफल उपचार में न्यूरोसर्जन, पीडियाट्रिशियन, एनेस्थेटिस्ट और आईसीयू विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह सफलता बच्चों की न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों की बढ़ती उपयोगिता और बेहतर परिणामों का उदाहरण है।
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