By 121 News
Chandigarh, Apr.18, 2026:-कमलेश बनारसी दास, पूर्व मेयर, चण्डीगढ़ नारी वंदन अधिनियम को लेकर देश में जो माहौल बनाया जा रहा है, वह वास्तविक सता से काफी दूर है। यह अधिनियम महिलाओं को अधिकार देने की बजाय एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा अधिक प्रतीत होता है।
यदि केंद्र सरकार वास्तव में महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहती, तो वर्तमान लोकसभा की सीटों में ही यह व्यवस्था तुरंत लागू की जा सकती थी। पूरा विपक्ष भी इस बात पर सहमत और तैयार था कि मौजूदा सीटों में ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, जिससे देश की महिलाओं को तुरंत उनका अधिकार मिल सके।
लेकिन ऐसा न करके, इस कानून को परिसीमन और जनगणना से जोड़ दिया गया। बिना जनगणना के परिसीमन करवाना और फिर उसी आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को तत्काल अधिकार देना नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक हितों के अनुसार सीटों का बंटवारा तय करना है।
महिलाओं के अधिकारों को टालना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। संविधान की मर्यादा को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, और इसी के तहत यह आवश्यक है कि महिलाओं को उनका हक तुरंत दिया जाए।
मेरा स्पष्ट मत है कि मौजूदा लोकसभा सीटों में ही 33% आरक्षण लागू किया जाए, ताकि देश की महिलाओं को बिना किसी देरी के उनका संवैधानिक अधिकार मिल सके।
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