By 121 News
Chandigarh, Feb.03,2026:– पंजाब और हरियाणा में कृषि-रेशा (एग्री-फाइबर) आधारित पल्प एवं पेपर पैकेजिंग के लिए पुनः उपयोग आधारित (सर्कुलर) और कम-कार्बन आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण पर केंद्रित अपनी तरह का पहली क्षेत्रीय बैठक हयात रीजेंसी, चंडीगढ़ में आयोजित की गई। यह गोलमेज बैठक असर (समाधान-आधारित जलवायु सहनशीलता पर काम करने वाली सामाजिक प्रभाव परामर्श संस्था)—और पर्यावरणीय गैर-लाभकारी संगठन कैनोपी के संयुक्त तत्वावधान में हुई। इसमें पंजाब व हरियाणा सरकारों के अधिकारी, पल्प व पेपर उद्योग के प्रतिनिधि, किसान संगठनों के सदस्य, विभिन्न ब्रांड्स तथा स्थिरता विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य इस पर साझा समझ विकसित करना था कि फसल अवशेषों को कम प्रभाव और कम-कार्बन पैकेजिंग सामग्री में कैसे बदला जा सकता है।
यह प्रारंभिक बैठक धान की पराली, गेहूं के भूसे और अन्य फसल अवशेषों को उद्योगों में उपयोगी कच्चे माल के रूप में अपनाने की संभावनाओं पर विचार की शुरुआत था। चर्चा के दौरान मौजूदा तरीकों को समझने, व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान करने और खेत से लेकर फैक्ट्री और बाजार तक पूरे कामकाज के अनुभवों से सीखने पर ध्यान दिया गया।
पंजाब सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्री, गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि पंजाब सरकार लगातार फसल अवशेष के टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस तरह की चर्चाएँ और संयुक्त प्लेटफार्म नीति निर्माताओं, उद्योग और किसानों को यह समझने में मदद करते हैं कि फसल अवशेष को कैसे बेहतर और अधिक टिकाऊ तरीके से मूल्य संवर्धित उद्योगों में उपयोग किया जा सकता है, साथ ही पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करते हुए किसानों की आय को भी समर्थन दिया जा सकता है।
हरियाणा सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा का औद्योगिक आधार परिपत्र (सर्कुलर) उत्पादन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। यह संवाद हमें यह समझने में मदद करता है कि कृषि अवशेष को कम-कार्बन पैकेजिंग सप्लाई चेन में इस तरह शामिल किया जा सकता है कि यह उद्योग और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी हो।
बैठक में दोनों राज्यों की पूरक ताकतों पर जोर दिया गया। आज हरियाणा और पंजाब दोनों कृषि क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं, और दोनों राज्यों को जो चुनौतियां सामना करनी पड़ती हैं, वे भी काफी हद तक समान हैं। हरियाणा और पंजाब की सरकारें, किसानों के साथ मिलकर, फसल अवशेष प्रबंधन के माध्यम से पराली जलाने की समस्या का समाधान ढूंढ सकती हैं।
विनुता गोपाल, सीईओ, असर ने कहा कि फसल अवशेष को कचरे के रूप में नहीं बल्कि एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। यह पहला संवाद इस बात को समझने के लिए है कि पंजाब और हरियाणा इस क्षमता का उपयोग कैसे कर सकते हैं, जिससे किसानों को लाभ मिले, जंगलों पर दबाव कम हो और भारत के लो-कार्बन सामग्री की ओर संक्रमण को समर्थन मिले।
श्रुति सिंह, कंट्री डायरेक्टर, कैनोपी, ने कहा कि कागज़, पैकेजिंग और वस्त्र उद्योग के लिए जंगल आधारित सप्लाई चेन अब वास्तविक जलवायु जोखिम के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। फसल अवशेष भारत के लिए एक व्यावहारिक और कम-कार्बन विकल्प प्रदान करते हैं, जो उद्योग के लिए कारगर है। इस संवाद में सरकार, मिल, किसान, नवप्रवर्तक और ब्रांड को एक ही मंच पर लाकर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि पंजाब और हरियाणा में कृषि-अवशेष आधारित परिपत्र सप्लाई चेन को बड़े पैमाने पर कैसे लागू किया जा सकता है। यह क्षेत्र भारत को 'नेक्स्ट जेन' मटेरियल्स की ओर बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
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