Saturday, 30 May 2026

थिरकन ललित कला केंद्र फाउंडेशन की प्रस्तुति “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” ने दर्शकों को किया भावुक और मंत्रमुग्ध

By 121 News
Chandigarh, May 30, 2025:- थिरकन ललित कला केंद्रा फाउंडेशन द्वारा आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से टैगोर थिएटर में प्रस्तुत भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” ने दर्शकों के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। शास्त्रीय नृत्य, भावपूर्ण अभिव्यक्तियों, प्रभावशाली कहानी, संगीत और एक सशक्त सामाजिक संदेश से सजी इस प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर सराहना और प्रेम दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पावन गणेश वंदना से हुआ, जिसके पश्चात लाइव भरतनाट्यम, कथक, तराना तथा मुख्य नृत्य-नाटिका “शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दी गईं। प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनाओं, अध्यात्म और भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्धता से जोड़ दिया।

“शक्ति – द बर्निंग साइलेंस” केवल एक नृत्य-नाटिका नहीं, बल्कि उन अनगिनत महिलाओं के मौन संघर्षों की भावनात्मक यात्रा थी, जो अपने भीतर की दिव्य शक्ति, साहस और आत्मबल को संजोए रहती हैं। शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से इस प्रस्तुति का उद्देश्य जागरूकता, भावनात्मक संवेदनशीलता और आत्मशक्ति का संदेश फैलाना था।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में नरेंद्र धंड, भूपिंदर सिंह (आईपीएस), एस.पी. राजशेखरन, अभिषेक शर्मा तथा गुरु मैय्या श्रीमती इल्ला पांडे उपस्थित रहे। सभी गणमान्य अतिथियों ने विद्यार्थियों के अनुशासन, समर्पण, कलात्मक उत्कृष्टता और मंच पर भावपूर्ण अभिव्यक्तियों की अत्यंत सराहना की।

संस्था की आर्टिस्टिक डायरेक्टर रचिता राठौर ने बताया कि इस प्रस्तुति में लगभग 65 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनकी आयु 6 वर्ष से प्रारंभ होती है। प्रस्तुति में डॉक्टर, बैंक मैनेजर, आईटी प्रोफेशनल्स तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यरत वयस्क विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य बचपन से ही भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाओं के प्रति रुचि जागृत करना है, ताकि ये कलाएँ बच्चों के जीवन में गहराई से रच-बस जाएँ और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को विलुप्त होने से बचाया जा सके। उन्होंने सांस्कृतिक विभाग से अनुरोध किया कि छोटे बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए अधिक मंच और अवसर प्रदान किए जाएँ, जिससे अधिक युवा पीढ़ी शास्त्रीय कलाओं से जुड़ सके और इन परंपराओं को भविष्य तक सुरक्षित रखा जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आज भारतीय शास्त्रीय नृत्य कलाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सांस्कृतिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और कला प्रेमियों को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। विभिन्न कलात्मक समुदायों के सहयोग से होने वाले सांस्कृतिक आयोजन न केवल युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि समाज को भारतीय संस्कृति की सुंदरता, गहराई और आध्यात्मिक समृद्धता का अनुभव भी कराते हैं।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शास्त्रीय नृत्य केवल एक कला नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और अनुशासन का सशक्त माध्यम है। आज के तनावपूर्ण जीवन में कथक और भरतनाट्यम जैसे नृत्य बच्चों और युवाओं के लिए प्रभावी तनाव-निवारक के रूप में कार्य करते हैं, जो सकारात्मकता, एकाग्रता, भावनात्मक अभिव्यक्ति और आंतरिक संतुलन प्रदान करते हैं।

उन्होंने अभिभावकों और युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं को केवल मंचीय प्रस्तुति न समझें, बल्कि जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा मानते हुए उन्हें अपनाएँ और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।

इस प्रस्तुति का क्रिएटिव डायरेक्शन आशीष शुक्ला द्वारा किया गया, जबकि कोरियोग्राफी सुश्री अनुश्री लाडिया भार्गव एवं सुश्री स्वाति शर्मा ने तैयार की। प्रभावशाली स्क्रिप्ट लेखन और सशक्त नैरेशन सुश्री पूनम पंत द्वारा प्रस्तुत किया गया। तकनीकी एवं विश्लेषणात्मक मार्गदर्शन  अरिजीत मुखर्जी द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन राकेश अरोड़ा ने किया।

कला प्रेमियों, रंगमंच के शौकीनों, अभिभावकों और समाज के विभिन्न वर्गों ने इस सार्थक एवं प्रेरणादायक प्रस्तुति का आनंद लिया, जो शास्त्रीय कला, भावनाओं, सामाजिक जागरूकता और प्रभावशाली कहानी का अद्भुत संगम बनकर उभरी।

कार्यक्रम का समापन दर्शकों की जोरदार तालियों और स्टैंडिंग ओवेशन के साथ हुआ। उपस्थित दर्शकों ने सभी कलाकारों की प्रशंसा करते हुए इस प्रस्तुति को अविस्मरणीय, प्रेरणादायक और भावनात्मक रूप से अत्यंत प्रभावशाली अनुभव बताया।
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