Thursday, 21 May 2026

प्राचीन पीर गुगा माड़ी / लखदाता मंदिर में सीमा रानी चौहान को भावी गद्दीनशीन घोषित किया गया:      भव्य वार्षिक उत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न

By 121 News
Chandigarh, May 21,2026: -प्राचीन पीर गुगा माड़ी / लखदाता मंदिर (पुराना बिजवाड़ा), सेक्टर 36-बी, चंडीगढ़ में एक ऐतिहासिक एवं भावनात्मक अवसर पर वर्तमान गद्दीनशीन महंत श्री जय कृष्ण नाथ जी ने अपनी बड़ी पुत्री सीमा रानी चौहान को मंदिर की भावी गद्दीनशीन एवं उत्तराधिकारी घोषित किया। यह घोषणा मंदिर परिसर में आयोजित वार्षिक धार्मिक उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं, संत समाज और संगत की उपस्थिति में की गई।

महंत श्री जय कृष्ण नाथ जी ने कहा कि पीर गुगा माड़ी / लखदाता मंदिर की यह पवित्र गद्दी उनके पूर्वजों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार में चली आ रही है। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय श्री फकीर चंद जी सहित पूर्वजों ने वर्षों तक मंदिर की सेवा, पूजा-अर्चना और संगत की सेवा को अपना जीवन समर्पित किया और उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प अब सीमा रानी चौहान निभाएंगी।

उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि यह गद्दी केवल अधिकार नहीं बल्कि सेवा, त्याग और श्रद्धा की पहचान है। मैंने अपना पूरा जीवन मंदिर और संगत की सेवा में बिताया है और अब मेरी इच्छा रही कि सीमा रानी इसी श्रद्धा और समर्पण के साथ मंदिर की परंपराओं को आगे बढ़ाए। मुझे विश्वास है कि वह संगत के सहयोग और आशीर्वाद से इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएंगी।

महंत श्री जय कृष्ण नाथ जी ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर की व्यवस्थाएं, धार्मिक परंपराएं, भंडारे, लंगर सेवा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का संचालन पूर्व की तरह निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने अपनी छोटी पुत्री मीनाक्षी का भी विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों बहनें मिलकर मंदिर की सेवा एवं व्यवस्थाओं को सहयोगपूर्वक आगे बढ़ाएंगी।

भावी गद्दीनशीन सीमा रानी चौहान उर्फ सीमा नाथ ने संगत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और गर्व का विषय है। यह केवल पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि गुरु परंपरा और श्रद्धा का पवित्र दायित्व है। मैं अपने पिता जी और पूर्वजों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए मंदिर की मर्यादाओं, सेवा भावना और धार्मिक परंपराओं को पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ आगे बढ़ाऊंगी। संगत की सेवा और मंदिर की प्रतिष्ठा को बनाए रखना मेरी पहली प्राथमिकता रहेगी।

महामंडलेश्वर श्रीमती सुरेन्द्रा देवी जी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंदिर वर्षों से श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता का केंद्र रहा है। आज जो जिम्मेदारी सीमा रानी को सौंपी गई है, वह केवल गद्दी का उत्तराधिकार नहीं बल्कि सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प है। हमें पूर्ण विश्वास है कि दोनों बेटियां प्रेम, सहयोग और श्रद्धा के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करेंगी।

गद्दीनशीन की घोषणा के उपरांत मंदिर परिसर में ज्येष्ठ माह के ज्येष्ठ वीरवार के अवसर पर आयोजित एकदिवसीय वार्षिक उत्सव श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। सुबह हवन यज्ञ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। इसके बाद विधिवत ध्वजारोहण किया गया और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण गूंज उठा।

दोपहर में विशाल लंगर एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, जलपान, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं के विशेष प्रबंध किए गए थे।

सांयकाल में आयोजित संकीर्तन एवं प्रवचन कार्यक्रम मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से लुधियाना से पधारे स्वामी अध्यात्मानंद जी, खुड्डा अलीशेर से श्री श्री 108 योगी सूरज नाथ जी तथा चंडीगढ़ से योगी उषा नाथ जी, योगी तिलक राज जी ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों से संगत को धर्म, सेवा और मानवता का संदेश दिया।

मंदिर परिसर में स्थित शनि मंदिर, काली माता मंदिर, बाबा बालक नाथ मंदिर, गोरखनाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, शिव परिवार, नगर खेड़ा, भैरों स्थान, शीतला माता मंदिर तथा अन्य प्राचीन धार्मिक स्थलों में भी श्रद्धालुओं ने माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के समापन पर मंदिर प्रबंधन समिति ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, सेवादारों और संगत का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग और आशीर्वाद बनाए रखने की अपील की।
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