Thursday, 21 May 2026

बाल समागम में बच्चों ने बिखेरी आध्यात्मिक चेतना की रोशनी:            सतगुरु की शिक्षाओं से संस्कारवान बन रही नई पीढ़ी

By 121 News
Chandigarh, May 21, 2026:- सतगुरु द्वारा दिए जा रहे ब्रह्मज्ञान एवं शिक्षाओं के माध्यम से बच्चों में मर्यादा, अनुशासन, शुकराने और मानवता के संस्कार विकसित होते हैं, आज के युग में यदि बच्चे सत्संग एवं सतगुरु की शिक्षाओं से जुड़े रहें, तो यह संसार व देश के लिए अच्छे नागरिक बन पायेगे, ये उद्गार आज यहां संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-15, में हुए एक भव्य एवं प्रेरणादायी बाल समागम में हज़ारों की संख्या में उपस्थित बच्चों, महिलाओं, नौजवानों, बुजुर्गों को सम्बोधित करते हुए मनीमाजरा के मुखी अमरजीत सिंह जी ने व्यक्त किए ।

  इस समागम में हर आयु के बच्चों ने सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन संदेशों को गीत, कविता, भाषण, कव्वाली, स्किट एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। समागम में बच्चों की प्रतिभा, अनुशासन, मर्यादा एवं आध्यात्मिक भावनाओं ने उपस्थित साध-संगत को भाव-विभोर कर दिया। 

अमरजीत सिंह ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि ये बच्चे केवल छोटे नहीं बल्कि “सयाने संत” हैं, जो अपनी छोटी उम्र में ही सतगुरु की शिक्षाओं को जीवन में उतार रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में जो अनुशासन, प्रेम एवं विनम्रता दिखाई देती है, वह सत्संग, परिवारों के त्याग और सेवादारों के सहयोग का परिणाम है।

उन्होंने अपने प्रवचन में समझाया कि जिस प्रकार नाविक (मल्लाह) की सलाह के बिना गहरे पानी में जाना उचित नहीं होता, उसी प्रकार जीवन में माता-पिता एवं सतगुरु की शिक्षाओं का पालन करना आवश्यक है। बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान, मर्यादा में रहना, बाहर के खान-पान से बचना, नियमित अरदास एवं सिमरन करना तथा संगत से जुड़े रहना जीवन को सफल बनाता है।

अमरजीत सिंह आगे ने कहा कि बच्चों को किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा, ईष्र्या या दिखावे की भावना में नहीं आना चाहिए। उन्होंने बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि “पनीर नहीं तो दाल में खुश हूं”, अर्थात हर परिस्थिति में संतुष्ट और खुश रहना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल, चमक-दमक एवं भौतिक आकर्षणों से बचते हुए सतगुरु के नाम धन को अपनाने की प्रेरणा दी। 

उन्होंने यह भी कहा कि संगत और सेवा बच्चों के व्यक्तित्व को ऊँचाइयों तक पहुंचाती है तथा उन्हें जीवन में स्थिरता और संस्कार प्रदान करती है। आज विश्वभर में निरंकारी मिशन के बाल समागम इसी उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ा जा सके। 

समागम के दौरान बच्चों द्वारा विभिन्न भाषाओं एवं माध्यमों में प्रस्तुत संदेशों ने सभी को यह अनुभव कराया कि नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना और मानवता के संस्कार निरंतर विकसित हो रहे हैं। उपस्थित संगत ने बच्चों की प्रतिभा एवं समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। 

अंत में अमरजीत सिंह जी ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का कोटि-कोटि शुकराना करते हुए कहा कि सतगुरु की कृपा से ही बच्चों में प्रेम, सेवा, विनम्रता एवं इंसानियत के संस्कार विकसित हो रहे हैं। उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे बच्चों को सत्संग, सेवा एवं संगत से जोड़कर रखें ताकि वे जीवन में आध्यात्मिक एवं सामाजिक दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें। 

इससे पूर्व यहां के मुखी एस.एस.बांगा  ने इस अवसर पर उपस्थित सभी बच्चों, उनके माता-पिता व अन्य उपस्थित सज्जनों का धन्यवाद किया । इस अवसर पर यहां के संयोजक नवनीत पाठक भी उपस्थित थे ।
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