By 121 News
Chandigarh, May 07, 2026:- “पंजाब में हीटवेव: विज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता” विषय पर एक मल्टी स्टेकहोल्डर्स वर्कशाप का आयोजन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन क्लीन एयर पंजाब, चंडीगढ़ प्रेस क्लब और भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से किया गया। वर्कशॉप में विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बढ़ती गर्मी और हीटवेव से जुड़े खतरों पर चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत चंडीगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष सौरभ दुग्गल के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद क्लीन एयर पंजाब की निदेशक सनम सुतीरथ वज़ीर ने विषय की पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की योजनाओं में सबसे ज्यादा प्रभावित और कमजोर समुदायों को केंद्र में रखना बेहद जरूरी है।
सनम सुतीरथ वज़ीर ने कहा कि हीटवेव अब किसानों से लेकर गिग वर्कर्स (ऐप आधारित डिलीवरी एवं सेवा कर्मी) तक, सबसे कमजोर वर्गों के लिए रोजमर्रा की सच्चाई बनती जा रही है। केवल जागरूकता फैलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर देखभाल और राहत की ऐसी व्यवस्थाएं बनानी होंगी, जिनमें कूलिंग स्पेस और सामुदायिक सहयोग तंत्र शामिल हों।
वर्कशॉप के पहले सत्र में हीटवेव के वैज्ञानिक पहलुओं, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और कृषि तैयारियों पर चर्चा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग, चंडीगढ़ के वैज्ञानिक शिविंदर ठाकुर ने बदलते हीटवेव पैटर्न और समय रहते चेतावनी लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की डॉ. प्रभज्योत कौर और केवीके, एसएएस नगर के उपनिदेशक डॉ. बलबीर सिंह खड्डा ने बताया कि बढ़ती गर्मी का असर फसलों, मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है। प्रगतिशील किसानों बलदीप सिंह और पलविंदर सिंह ने भी खेत स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान के अनुभव साझा किए।
दूसरे सत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक प्रतिक्रिया पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. निधि और वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ए.के. मंडल ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
सामुदायिक नेता गुरप्रीत सिंह और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अमनदीप सिंह ने लोगों तक जागरूकता पहुंचाने और समय पर मदद सुनिश्चित करने में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वर्कशॉप में गिग और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की समस्याओं पर भी विशेष चर्चा हुई। चंडीगढ़ के गिग वर्कर टेक चंद ने बताया कि लंबे समय तक खुले में काम करने वाले श्रमिकों के पास न तो पर्याप्त छाया होती है और न ही आराम और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं।
टेक चंद ने कि उन जैसे कामगारों के लिए गर्मी केवल असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा बन सकती है। लंबे समय तक धूप में काम करना पड़ता है। ऐसे में कूलिंग स्पेस और बुनियादी सुविधाएं हमारी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।
वर्कशॉप में सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हीटवेव केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि यह जनस्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी गंभीर चुनौती है। खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों के लिए सुलभ कूलिंग स्पेस विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि अत्यधिक गर्मी के दौरान सामुदायिक केंद्रों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक भवनों को अस्थायी कूलिंग शेल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में इस बात पर सहमति जताई गई कि हीटवेव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विज्ञान, नीति और सामुदायिक भागीदारी के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है, ताकि सबसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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