Monday, 4 May 2026

डा.अशोक शर्मा ने कार्निया केरेटोप्लास्टी कर बचाई आंखों की रोशनी

By 121 News
Chandigarh, May 04, 2026:-देश में लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता पैदा होने से जरूरतमंद मरीजों को इससे बड़ी राहत मिल रही है। लोगों की ओर से अंगदान के लिए आगे आने से एक मरीज के अंगों को दान करने पर आधा दर्जन दूसरे जरूरतमंद मरीजों को अंग प्रत्यारोपण कर नया जीवन चिकित्सक प्रदान कर रहे हैं। चंडीगढ़ शहर में लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता पैदा करने में पीजीआई एवं दूसरे अस्पताल अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में आंखों की रोशनी खो चुके मरीजों के लिए कार्निया ट्रांसप्लांट आशा की किरण साबित हो रहा है।
डा. अशोक शर्मा ने बताया कि आपकी आंख के सामने स्थित पारदर्शी, गुंबद के आकार की परत कॉर्निया होती है। यह आपकी आंख के लिए विंडशील्ड की तरह काम करती है। यह धूल, रोगाणुओं और अन्य चीजों को अंदर आने से रोकती है। इसका विशिष्ट आकार आपकी दृष्टि के कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और कुछ पराबैंगनी (यूवी) किरणों को भी फिल्टर करता है। कॉर्निया आपकी आंख की सतह की रक्षा करने वाली पहली परत होती है, इसलिए इसमें चोट लगने और क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी रहता है। उक्त जानकारी डा.अशोक शर्मा कार्निया सेंटर के निदेशक डा.अशोक शर्मा ने विशेष बातचीत में दी जो पीजीआई के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर रह चुके हैं।
उन्होंने बताया कि उनके पास एक एेसा मरीज आया जिसकी आंख के कार्निया में चोट लगने पर तीन बार दूसरे सेंटरों में कार्निया ट्रांसप्लांट होने के बाद भी आंख की रोशनी में सुधार नहीं हुआ। एेसे में मरीज के आंख में संक्रमण होने से नजर कम होती जा रही थी। उन्होंने कहा कि बार बार कार्निया ट्रांसप्लांट करने एवं ग्राफ्टिंग से भी उसके सफल होने की संभावना कम हो जाती है।
उन्होंने बताया कि उनके पास आई युवती की आंख का गहराई से जांच करने के बाद फिर से कार्निया केरेटोप्लास्टी करने का फैसला का आंख की खोई हुई रोशनी को बचाने के लिए लिया। इसमें मरीज के परिजनों पर सहयोग दिया। मरीज की आंख में पहले संक्रमण को दूर किया गया फिर कार्निया केरेटोप्लास्टी किया गया। इसके साथ मरीज की पुतली को बदल कर उसमें लैंस डाले गए। इसके बाद मरीज का नियमित फलोअप कर उसकी आंखों का विजन 6/6 करने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने बताया कि अंगदान में एक अच्छा कार्निया दान में मिलने से मरीज के जीवन को रोशन करने में मदद मिली। इसमें परिवार व अंगदान करने वाले मरीजों के परिजनों का श्रेय जाता है। उन्होंने कहा कि  पिछले पांच सालों में 968 कार्निया ट्रांसप्लांट कर चुके हैं और इस दौरान 218 मरीज एेसे भी आए हैं जिनमें कार्निया रिग्राफ्टिंग कर उनकी आंख  की रोशनी को बचाया गया है।
उन्होंने कहा कि आंखों की रोशनी को बचाना केवल एक चिकित्सक का काम नहीं होता है बल्कि इसमें मरीज की ओर से भी सावधानी बरतने एवं चिकित्सक की ओर से बताई गई दवाओं का प्रयोग करना शामिल होता है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक के लिए किसी मरीज की खोई हुई आंखों की रोशनी को वापस लौटाना ही सबसे बड़ी खुशी एवं सफलता होती है। डा. शर्मा ने बताया कि उनके पास एेसे कई मरीज आते हैं जिनकी आंखों की रोशनी को वापस लौटाने पर आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।


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