By 121 News
Chandigarh, Apr.12, 2026:- मानव जीवन संबंधों, परिस्थितियों और भावनाओं का संगम है। हम प्रतिदिन अनेक लोगों से मिलते हैं और विभिन्न परिस्थितियों का सामना करते हैं। अक्सर किसी के व्यवहार को देखकर हम जल्दबाजी में यह निष्कर्ष निकाल लेते हैं कि सामने वाला गलत है या उसने जानबूझकर ऐसा किया है, जबकि वास्तविकता यह भी हो सकती है कि वह व्यक्ति किसी कठिन परिस्थिति, मजबूरी या व्यक्तिगत समस्या से गुजर रहा हो। यदि हम “बेनिफिट ऑफ डाउट” को अपनाते हुए दूसरों को समझने के लिए समय दें तो हम अपने मन में अनावश्यक नकारात्मकता भाव उत्पन्न होने से बच सकते हैं, ये उद्गार आज यहां सेक्टर 30 स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित महिला समागम के दौरान स्थानीय प्रचारक डॉ. अमृतपाल कौर ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों में ”बेनिफिट ऑफ डाउट” पर की गई चर्चा का उल्लेख करते हुए डॉ0 कौर ने कहा कि यह दृष्टिकोण केवल सामाजिक जीवन ही नहीं, बल्कि पारिवारिक जीवन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। घर-परिवार में छोटे-छोटे मतभेद अक्सर इसलिए बढ़ जाते हैं क्योंकि हम एक-दूसरे की बात को बिना समझे तुरंत प्रतिक्रिया दे देते हैं। यदि हम धैर्य रखते हुए यदि साकारात्मक भाव से सोचें तो कई विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं। इससे रिश्तों में विश्वास, प्रेम और आपसी सम्मान बढ़ता है। उन्होंने आगे कहा कि यह सोच आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने के लिए भी जरूरी होती है, क्योंकि यह हमें अपने अहंकार और जल्दबाजी पर नियंत्रण रखना सिखाती है तथा हर स्थिति को समझदारी और करुणा से देखने की प्रेरणा देती है। यह दृष्टिकोण व्यक्ति को विनम्र बनाता है और दूसरों के प्रति सहानुभूति विकसित करता है। जब हम दूसरों को संदेह का लाभ देते हैं, तो वास्तव में हम अपने मन को शांति प्रदान करते हैं और जीवन को सरल बनाते हैं। यह तभी संभव है यदि समय के सतगुरु की शरण में जाकर ब्रहमज्ञान प्राप्त कर जीवन में अपनाते हैं।
इससे पूर्व यहां अनेक वक्ताओं ने सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा दिए गए ब्रहमज्ञान से अपनी जीवन-यात्रा को सुखमयी बनाने के तरीके के बारे में अपने अपने भाव व्यक्त किए और सैक्टर 40 ऐरिया के मुखी श्री पवन कुमार जी ने डा0 अमृतपाल कौर जी और जोनल इन्चार्ज, संयोजक तथा यहां उपस्थित सारी साधसंगत का धन्यवाद व स्वागत किया ।
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