Sunday, 30 March 2025

शास्त्रीय गायन एवं तबला, जलतरंग एवं डिजेम्बे की अनूठी तिकड़ी से श्रोता हुए भाव-विभोर

By 121 News
Chandigarh, Mar.30, 2025:-प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित किए जा रहे अखिल भारतीय भास्कर राव सम्मेलन के पांचवे दिन आज टैगोर थियेटर में विदुषी शुभ्रा गुहा  के शास्त्रीय गायन एवं तबला , जलतरंग  एवं डिजेम्बे की  अनूठी तिकड़ी ने संगीत प्रेमियों को आनंद का अनुभव करवाया । आज सभागार में बहुत से कला से जुड़े गुणीजन भी उपस्थित थे । आज के कार्यक्रम में श्री अजित बालाजी जोशी , आईऐएस , प्रशासनिक सचिव, ग्रामीण विकास पंचायत एवं  कराधान,  पंजाब सरकार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में  शिरकत की।
आज के कलाकारों में विदुषी सुभ्रा गुहा आगरा घराने की एक अग्रणी गायिका हैं और उनकी संगीत यात्रा श्री सतीश भौमिक के मार्गदर्शन में शुरू हुई, उसके बाद पंडित सुनील बोस, पंडित के.जी. गिंडे और पंडित डी.टी. जोशी के तहत आईटीसी संगीत अनुसंधान अकादमी में गहन प्रशिक्षण लिया। ख्याल और पूरब अंग ठुमरी पर अपनी असाधारण पकड़ के लिए जानी जाने वाली, वह अपने प्रदर्शन में त्रुटिहीन रागदारी, गीतात्मक सौंदर्यशास्त्र और अद्भुत स्वर स्पष्टता का मिश्रण करती हैं। वह ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन की 'ए टॉप' ग्रेड की कलाकार हैं, उन्होंने  प्रतिष्ठित समारोहों में प्रदर्शन किया है। उन्होंने देश के ही नहीं विदेशों में भी प्रदर्शन और शिक्षण कार्य दिए हैं।
उस्ताद तौफीक कुरैशी एक वरिष्ठ  संगीतकार हैं, जिन्हें समकालीन विश्व पर्कशन के साथ भारतीय शास्त्रीय लय के अपने अनूठे संलयन के लिए जाना जाता है। महान उस्ताद अल्लारखा के बेटे और शिष्य और उस्ताद जाकिर हुसैन के भाई, तौफीक ने एक विशिष्ट शैली विकसित की है जिसमें शरीर और स्वर पर्कशन शामिल हैं, जो मंत्रमुग्ध करने वाले लयबद्ध रूपांकनों का निर्माण करते हैं। उनके ग्राउंडब्रेकिंग एल्बम रिधुन ने भारत में विश्व संगीत को फिर से परिभाषित किया, जिसमें विभिन्न पर्कशन शैलियों पर उनकी असाधारण कमान दिखाई गई उनके प्रदर्शन में परंपरा और नवीनता का सहज मिश्रण होता है, जो स्वर और लय पर उनकी महारत से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
पंडित रामदास पलसुले एक बेहद सम्मानित तबला वादक हैं, जो अपनी बौद्धिक गहराई और तकनीकी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। महान तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर के वरिष्ठ शिष्य, उन्होंने एकल तबला वादन और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रूपों में संगत दोनों में महारत हासिल की है।
पंडित मिलिंद तुलंकर  एक प्रतिष्ठित जलतरंग कलाकार हैं, जो इस दुर्लभ शास्त्रीय वाद्य को पुनर्जीवित करने और लोकप्रिय बनाने में अपने अथक प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। एक संगीत परिवार में जन्मे, वे अपने दादा पंडित शंकर वी. कान्हेरे से प्रेरित थे, और बाद में पंडित नयन घोष, उस्ताद शाहिद परवेज और पंडित सुरेश तलवलकर से मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनके अभिनव दृष्टिकोण ने उन्हें विभिन्न कला रूपों के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें जलतरंग को कथक, शहनाई, बांसुरी और यहां तक कि पेंटिंग और मूर्तिकला के साथ  समवेशित किया। 
आज के कार्यक्रम की शुरूआत विदुषी शुभ्रा गुहा  ने की जिसमें उन्होंने राग झिंझोटी  में पारम्परिक आलाप से शुरूआत की। इसके बाद विलम्बित एक ताल की बंदिश "पार न पायो तेरे करतार " पेश की । इसके बाद द्रुत बंदिश जिसके बोल थे " सावरे  सलोने से लागे मोरे नैन " जो कि तीन ताल में निबद्ध थी पेश की । जिसे दर्शकों ने बहुत सराहा । इसके बाद शुभ्रा  ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुएकाफी राग में निबद्ध एक टप्पा पेश किया और कार्यक्रम का समापन शुभ्रा  ने एक खूबसूरत ठुमरी ''कैसो निपट अनाड़ी सईआं '' पेश करके कार्यक्रम का सटीक समापन किया । इनके साथ मंच सांझा करने के लिए श्री मिथिलेश झा  ने तबले पर और विदुषी पारोमिता मुख़र्जी  ने हारमोनियम पर खूबसूरत संगत करके समां बांधा ।
इसके उपरांत पंडित रामदास पलसुले , मिलिंद तुलंकर तथा उस्ताद तौफ़ीक़ कुरैशी की तिकड़ी  ने मंच संभाला और जलतरंग , तबला तथा डिजेम्बे जैसे वाद्यों के सम्मिश्रण से सजी प्रस्तुति से दर्शकों को अभीभूत किया । इन्होने ने राग अभोगी में मत्या ताल में पारम्परिक आलाप से कार्यक्रम की सुंदर शुरूआत की । इसके बाद खूबसूरत जोड़ के साथ झाला पेश किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।   मधुर स्वर लहरियों से खनकते स्वरों से दर्शकों को जादुई संगीत का अनुभव मिला । इसके उपरांत  मध्य लाया तथा द्रुत तीन तीन ताल में खूबसूरत गतें पेश की कार्यक्रम की खूबसूरत समाप्ति इन्होंने तीनो वाद्यों के सवाल जवाब पेशकारी से की ।
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को उतरीया और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया ।
कल यानि  सम्मलेन के अंतिम दिन डॉ. संतोष नाहर  का वायलिन तथा रिम्पा शिवा ,संगीता अग्निहोत्री तथा सुनैना घोष के तबला तिकड़ी से  होगा।

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