Tuesday, 20 January 2026

आरआईसीएम, चंडीगढ़ में भारत–श्रीलंका सहकारी संवाद : व्यापार एवं क्षमता निर्माण पर आयोजन

By 121 News
Chandigarh, Jan.20, 2026:-क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (आरआईसीएम), चंडीगढ़ द्वारा उन्नती एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी, होशियारपुर (पंजाब) के सहयोग से आरआईसीएम परिसर में भारत–श्रीलंका सहकारी संवाद : व्यापार एवं क्षमता निर्माण का आयोजन किया गया। यह संवाद डॉ. शंथा जयारथने, वरिष्ठ परामर्शदाता, व्यापार, वाणिज्य, खाद्य सुरक्षा एवं सहकारी विकास मंत्रालय तथा माननीय सहकारिता मंत्री, श्रीलंका सरकार के सलाहकार एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास संस्थान, श्रीलंका के निदेशक, की भारत यात्रा के संदर्भ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत के चयनित सहकारी नेताओं, सहकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे हुआ, जबकि सम्मेलन सत्र 11:00 बजे प्रारंभ हुआ। इस संवाद का उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच सहकारी-से-सहकारी सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए, विशेषकर व्यापार, संस्थागत साझेदारी एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में, विचार-विमर्श एवं अनुभव साझा करने हेतु एक केंद्रित मंच प्रदान करना था।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आरआईसीएम के निदेशक डॉ. राजीव कुमार ने दोनों देशों के सहकारी आंदोलनों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं संस्थागत संबंधों पर प्रकाश डाला तथा साझा मूल्यों को व्यावहारिक सहयोग में रूपांतरित करने हेतु संरचित सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में डॉ. शंथा जयारथने ने श्रीलंका के सहकारी पारितंत्र, नीतिगत दृष्टिकोण एवं द्विपक्षीय सहयोग की उभरती संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

संवाद के प्रमुख विषयों में कृषि, मूल्यवर्धित उत्पादों, मत्स्य पालन एवं सेवाओं में सहकारी-नेतृत्व वाले व्यापार की संभावनाएँ; प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास एवं अध्ययन-भ्रमण से संबंधित संयुक्त पहलें; तथा दोनों देशों के सहकारी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच संस्थागत सहयोग शामिल रहे ।

संवाद का समापन दो से तीन ठोस सहयोगात्मक मार्गों की पहचान, संभावित पायलट पहलों की खोज तथा संस्थागत समझौता ज्ञापनों (MoUs) एवं विनिमय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर सहमति के साथ हुआ। यह कार्यक्रम भारत और श्रीलंका के सहकारी क्षेत्रों के बीच सतत एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

No comments:

Post a Comment