Monday, 16 November 2020

बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ कार्य बहिष्कार जारी: 23 नवम्बर को गर्वनर हाऊस की तरफ कूच व 26 नवम्बर को होगी मुकम्मल हड़ताल

By 121 News

Chandigarh Nov. 16, 2020:- केन्द्र सरकार तथा चण्डीगढ़ प्रशासन द्वारा सुचारू रूप् से चल रहे तथा सस्ती बिजली देने के बावजूद मुनाफा कमा रहे बिजली विभाग को सीधे व असंवैधानिक तौर 100 प्रतिशत निजी मालिकों को बेचने के खिलाफ आज भी यूटी पावरमैन यूनियन के आह्वान पर बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में कार्य बहिष्कार कर बिजली दफ्तर सैक्टर 17 के सामने रोष प्रर्दषन किया।

      रोष प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए यूनियन व फेडरेशन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, यूनियन के प्रधान ध्यान सिंह, संयुक्त सचिव अमरीक सिंह, दर्शन सिंह, पान सिंह ने पड़ोसी राज्यों से काफी सस्ती दरों में बिजली देने के बावजूद लगातार मुनाफा कमा रहे बिजली विभाग को 100 प्रतिशत निजी मुनाफाखोरों को कोडियों के दाम बेचने की कड़ी निन्दा करते हुए कहा कि अभी बिजली एक्ट 2003 में संशोधन के लिए बनाया बिजली बिल 2020 संसद में पेश भी नहीं हुआ, उससे पहले ही आत्मनिर्भर भारत के नाम पर पैकेज देे के नाम पर केन्द्रशासित प्रदेशों के बिजली वितरण का निजीकरण का ऐलान कर सैकड़ों परिवारों को उजाड़ा जा रहा है। सारे राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों के वितरण का 100 प्रतिशत निजीकरण के लिए स्टैन्डरड बिडिग डाकूमेंट का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिस पर अभी जनता के सुझाव भी नहीं लिये गये।  लेकिन जल्दीबाजी में कुछ खास वर्ग के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए चण्डीगढ़ प्रशासन ने गैर संवैधानिक तौर पर मनमर्जी व हड़बड़ी में ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर बिडिग प्रोसेस भी शुरू कर दिया। जिसके लिए जेईआरसी को भी दरकिनार कर दिया।

      यूनियन के नेताओं कश्मीर सिंह, गुरमीत सिंह, रणजीत सिंह, दलेर सिंह, परमजीत सिंह व पूर्व प्रधान राम स्वरूप्,  मक्खन सिंह व भागमल राणा ने इस बात पर हैरानी जताते हुए कहा कि अरबों रूपए की जमीन, जायदाद, बिल्डिंग व एसैट की कीमत 1/- रूपए प्रति माह देना सरकार व प्रशासन के कुल्सित मंसूबों को दर्शाता है। सरकार कर्मचारियों को सीधे तौर निजी मालिकों के हवाले कर सेवाषर्ते, वेतन व भत्तों पर भी मौन है। सरकारी कर्मचारी का जीपीएफ महालेखाकार (एजी) से निकालकर प्राईवेट ट्रस्ट में जमा कर कर्मचारियों का जमा पैसा भी हजम करना चाहती है।

      फेडरेशन ऑफ यूटी इम्पलाईज के वरिष्ठ उप प्रधान राजेन्द्र कटोच , हरकेष चन्द, भीम सेन, बिहारी लाल, बोर्ड कारपोरेषन के नेता गुरदीप सिंह, सीआई टी यू के प्रधान कुलदीप सिंह, मनमोहन सिंह, उजागर सिंह मोही आदि ने आरोप लगाया कि प्रशासन मुनाफे में चल रहे विभाग को अपने आकाओं को थाली में रखकर दान दे रहा है। आखिर जनता का जमा एसीडी (160 करोड़) सिक्योरिटी करीब 800 करोड़ निजी मालिकों को देकर जनता के हितों से छल क्यों कर रही है। उन्होंने निजीकरण के खिलाफ संघर्ष में अपना पूरा समर्थन व संघर्ष में भागीदारी का ऐलान किया।

      प्रदर्शन में प्रशासन को चेतावनी दी की अगर प्रशासन ने गैरकानूनी तौर पर शुरू किये गये बिडिग प्रोसेस को बन्द कर निजीकरण का फैसला रद्द नहीं किया तो कार्य बहिष्कार व प्रदर्शन जारी रहेगें तथा 23 नवम्बर को सारा काम ठप्प कर राजभवन की तरफ कूच किया जायेगा व 26 नवम्बर 2020 को 24 घंटे की मुकम्मल हड़ताल की जायेगी जिस कारण आम जनता को होने वाली परेशानी के लिए प्रशासन का अडियल रवैया जिम्मेवार होगा।

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