By 121 News
Chandigarh 15th February:- भगवान श्रीराम कहते है जो मानव अपने परायों में या बच्चों में कोई भेद नही समझते हैं वे मेरा प्रिय भक्त है। वह सदा मेरे हृदय में निवास करता है और मैं उनकी हर मनोकामना पूर्ण करता हुं। यह प्रवचन परम् पूज्य आचार्य डॉ नन्दीश्वर जी महाराज ने सेक्टर 24 स्थित शिव मंदिर शिवालय खेमपुरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को दिये।
परम् पूज्य आचार्य डॉ नन्दीश्वर जी महाराज ने श्रीराम कथा की महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि माद्य महात्म्य के इसी महीने में भगवान शिव ने कुम्भज ऋषि के मुखारविंद से यह कथा सर्वप्रथम सुनी थी। उन्होंने बताया कि भगवान के प्रति समर्पण भाव के साथ निर्मलता, पवित्रता भी होनी चाहिए जिससे भगवान की प्राप्ति आसानी से हो सकती है। इस संसार रूपी बगीचे में यह फल रूपी मानव शरीर भी एक फल की तरह है। राम कथा यानि चरित्र निर्माण नाना प्रकार के विषयों से बचने के लिए यह भगवान राम की पावन कथा है जो जीना सिखाती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सुख है, वैभव है लेकिन राम नही है तो जीवन बेकार है। उन्होंने बताया कि राम तीन अक्षरों से बना है। र+अ+म अर्थात् र- अग्नि है अग्नि शिव है, अ-सूर्य है अर्थात नारायण है और म- चंद्रमां यानि बह्मा है इसलिए राम बोलने से शिव, बह्मा, विष्णु भगवान प्रसन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि राम बोलने से मुख पवित्र होता है, सूर्य दृष्टि के देवता है तो दृष्टि सुधर जाती है, चंद्रमा मन का देवता है तो मन सुधर जाता है।
इस भव्य कथा में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व चीफ इंजीनियर, चंडीगढ़ एस. के. चढ्ढा के साथ परम् पूज्य स्वामी बलबीर जी, पूज्य पं. श्रीरामेश्वर प्रसाद, शिव मंदिर शिवालय खेमपुरी के पं. राम गोपाल शास्त्री तथा पं. चंद्रभूषण शास्त्री, डॉ वेणुधर पात्रा, शिवालय खेमपुरी के प्रबंधक गोविन्द हरि, सभा के प्रधान सरदारी लाल गोस्वामी, चंद्रशेखर बंसल, जगदीश मिश्रा, और सुरेश बंसल भी मौजूद थे।
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