By 121 News
Chandigarh, Jan.18, 2026:-चंडीगढ़ तमिल संगम (पंजीकृत) ने तमिलनाडु सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से रविवार को सेक्टर-30B, चंडीगढ़ स्थित भारती भवन में 56वाँ थाई पोंगल उत्सव एवं "मुथमिझ अरिग्नर कलैग्नर स्मारक केंद्र का उद्घाटन सफलतापूर्वक आयोजित किया।
इस कार्यक्रम में तमिल समुदाय के सदस्यों, सांस्कृतिक प्रेमियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जो एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को दर्शाती है। कार्यक्रम का शुभारंभ थाई पोंगल से संबंधित पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। थाई पोंगल तमिलों का प्रमुख फसल पर्व है, जो प्रकृति, किसानों, पशुधन तथा सूर्य देवता के प्रति कृतज्ञता और समृद्धि का प्रतीक है।
उत्सव के दौरान तमिल विरासत को प्रदर्शित करने वाली रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं। नादस्वरम, थविल, उरुमी, थप्पु और पंबै जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की और अपनी लयबद्ध एवं पारंपरिक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण "मुथमिझ अरिग्नर कलैग्नर स्मारक केंद्र' का उद्घाटन रहा। यह केंद्र तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एवं तमिल साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सुधार के महान पुरोधा कलैग्नर डॉ. एम. करुणानिधि की स्मृति में स्थापित किया गया है। इस स्मारक केंद्र का उद्देश्य तमिल भाषा के तीन आयामों-इयल (साहित्य), इसे (संगीत) और नाटक (नादगम) को प्रोत्साहित करना तथा सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के लिए एक मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण पारंपरिक तमिल भोजन रहा, जिसे प्राचीन परंपरा के अनुसार केले के पत्ते पर परोसा गया। प्रतिभागियों को तमिलनाडु से विशेष रूप से मंगाए गए गन्ने सहित सोलह प्रकार के प्रामाणिक तमिल व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिला, जिससे भोजन की पारंपरिकता और सांस्कृतिक प्रामाणिकता सुनिश्चित हुई। यह उत्सवपूर्ण भोज सभी के लिए एक यादगार और समृद्ध पाक अनुभव रहा।
इस अवसर पर संगम के पदाधिकारियों ने तमिल भाषा और संस्कृति के संरक्षण के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला, विशेषकर उन युवा पीढ़ियों के लिए जो तमिलनाडु से बाहर रहकर जीवन यापन कर रही हैं।
इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक एकीकरण, समावेशन और सामुदायिक सेवा के प्रति संगम की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। चंडीगढ़ तमिल संगम उत्तर भारत में तमिल भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसमें नियमित उत्सव, साहित्यिक गोष्ठियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक पहल शामिल हैं। आयोजकों ने तमिलनाडु सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग, प्रतिभागियों, कलाकारों, स्वयंसेवकों तथा दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह आयोजन अत्यंत सफल रहा।
No comments:
Post a Comment