Tuesday, 22 September 2020

जोगिंदर सिंह भसीन की आत्मिक शांति के लिए अंतिम अरदास आयोजित: रोज की जाने वाली अरदास में शामिल हैं उनके द्वारा लिखित पंक्तियाँ

By 121 News

Chandigarh Sept.22, 2020:- अकाल पुरुख की हजूरी में रोज की जाने वाली अरदास में शामिल पंक्तियों  "श्री ननकाना साहिब ते होर गुरुद्वारियाँ और गुरुधामा, जिना तो पंथ नू विछोड़िया गया है,तिन्हा दे खुले दर्शन दीदार ते सेवा संभाल दा दान खालसा पंथ जी नू बख्शो" के रचयिता, सरदार जोगिंदर सिंह भसीन, जोकि 18 सितंबर को इस संसार को अलविदा कह प्रभु चरणों मे लीन हो गए हैं, की आत्मा की शांति हेतु आज अंतिम अरदास का आयोजन गुरुद्वारा बाग शहीदां, सेक्टर 44 , चंडीगढ़ में किया गया। विभिन्न रागी जत्थों ने इस मौके कीर्तन दरबान सजा गुरु की वाणी का गुणगान किया गया। इस दौरान उनके पुत्रों तेजिंदर सिंह भसीन, सुखविंदर सिंह भसीन और पुत्रियों गुरप्रीत कौर, जसबीर कौर, कंवलजीत कौर और सरबजीत कौर सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों के अलावा सिख समाज से जुड़े गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। एक तरफ इस मौके यहाँ माहौल पूरा ग़मगीन हो रखा था, वहीँ गुरुद्वारा बाग़ शहीदां की ऑफिसियल मेल पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल की तरफ से आयी मेल, जिसमे उनके द्वारा लिखी गई पंक्तियों को मान्यता देने की बात कबूल की गई, ने सभी के चेहरों पर ख़ुशी ला दी। इस दौरान कोरोना वायरस को लेकर जारी सरकारी नियमों का भी पूरी तरह से पालन किया गया। वहीं इस मौके पहुंची संगतों को गुरु का लंगर भी बाँटा गया।

सरदार जोगिन्दर सिंह भसीन की सपुत्री सरबजीत कौर भसीन के अनुसार उनके पिता जोगिन्दर सिंह भसीन का जन्म गाँव नीला, तहसील चकवाल, पाकिस्तान में हुआ था। वर्ष 1944 में जोगिन्दर सिंह भसीन पारिवार सहित अमृतसर गए थे और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में जॉब करने लग गए थे   वर्ष 1947 में भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद 1948 में विछुड़े गुरुधामों के दर्शन दीदार व् सेवा संभाल के लिए अरदास विनती लिखने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर की एक मीटिंग हुयी, जिसमे विछुड़े हुए गुरुधामों के लिए मीटिंग में आये हुए सभी सदस्यों को लिखने के लिए बोला गया, कुछ दिन बाद जब फिर सभी सदस्य दुवारा इकट्ठे हुए तो सब ने अपने अपने विचार प्रकट किये, पर उस समय जोगिन्दर सिंह भसीन की तरफ से लिखी गयी पंक्तियाँ "हे अकाल पुरुख सदा सहाय जिओ, श्री ननकाना साहिब ते होर गुरूद्वारे, गुरुधामा  जिणां नू इस पंथ तौं विछोड़िया गया, तिन्हा दे दर्शन दीदार ते सेवा संभाल दा दान खालसा जी नू बख्शो" को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से मंजूरी दे दी गई। फिर कुछ समय बाद उन के पिता जी के द्वारा लिखित अरदास की पंक्तियों को  रोजाना पुरे विश्व में होने वाली अरदास विनती में पढ़ा, बोला और सुना जाने लगा। इस बहुमूल्य योगदान के लिए  मीरी पीरी डेवलपमेंट एंड वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से जोगिन्दर सिंह भसीन जी को विशेष सम्मान देने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर और श्री अकाल तखत साहिब को एक पत्र लिखा गया था, इस सम्बन्धी श्री अकाल तखत साहिब से 19/12/2019 को एक प्रस्ताव पास किया गया की जोगिन्दर सिंह भसीन को श्री अकाल तख़्त साहिब बुला कर विशेष सम्मान से सम्मानित किया जायेगा लेकिन कोरोना वायरस के कारण लगे लॉक डाउन के कारण यह प्रोग्राम हो सका। जबकि इस दौरान जोगिन्दर सिंह भसीन जी 18/09/2020 को इस संसार को अलविदा कहकर इस संसार से विदा हो गये।  

 

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