By 121 News
Chandigarh 15th February:- भगवान प्रत्येक युग में अपने भक्तों के दुखों को और भय को हरने के लिए तथा उन्हें दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार की लीलाए करते है और उनके हृदय में अपनी अमिट छाप छोड़ देते हैं। यह प्रवचन परम् पूज्य आचार्य डॉ नन्दीश्वर जी महाराज ने सेक्टर 24 स्थित शिव मंदिर शिवालय खेमपुरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को दिये।
परम् पूज्य आचार्य डॉ नन्दीश्वर जी महाराज ने यहां श्रद्धालुओं को शिव विवाह की कथा श्रवण करवाते हुए बताया कि जब समाज में अज्ञानता की कमी होती है, दुराचार व्यापत हो जाता है तब बह्मादि देवता, वेद भगवान की स्तुति करते है। तब भगवान प्रसन्न होकर अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए विवाह करते है। और जो संतान होती है जो समाज के दुखों को दूर करती है। जैसे गणेश जी व कार्तिक जी ने समस्त देवताओं का दुख दूर किया। और माता पिता को प्रसन्न कर पूज्यनीय हुए।
उन्होंने सती माता के देह त्याग का प्रसंग सुनाया जिसमें सती माता ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपना शरीर त्याग किया क्योंकि दक्ष प्रजापति ने वह यज्ञ भगवान शिव के अपमान के लिए किया था। क्योंकि कोई माता अपने पति का अपमान कभी सहन नही कर सकती फिर चाहे वह पिता का घर ही क्यों न हो। उन्होंने बताया कि अंत समय में सती माता ने भगवान शिव को याद किया और उनका अगला जन्म राजा हिमाचल के घर पर पार्वती के रूप में हुआ। उन्होंने बताया कि जब पार्वती थोड़ी बड़ी हुई तो उनके घर में महाऋषि नारद जी आये और उन्होंने पार्वती के पति स्वयं भगवान शिव को बताया। इसके बाद पार्वती ने कठिन तप कर भगवान शिव को पति रूप प्राप्त किया।
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