By 121 News
Chandigarh, Feb.01, 2026:--आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ ने बजट और फाइनेंस बिल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को कोई वास्तविक राहत नहीं दी गई है, जबकि बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुँचाया गया है।
विजयपाल सिंह, अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी, ने कहा कि फाइनेंस बिल 2026 और चंडीगढ़ यूटी बजट 2026–27 बड़े कॉरपोरेट मित्रों के लिए रास्ता खोलते हुए आम नागरिक, छोटे व्यापारी, कर्मचारी और पेंशनर्स पर लगातार आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस आर्थिक अन्याय के खिलाफ देश की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है और इस विकास-विरोधी बजट के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेगी, ताकि जनता को इस अन्याय की सच्चाई पता चल सके।
विक्रांत ए. तंवर, आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ के वरिष्ठ नेता, व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी एवं स्टेट मीडिया इंचार्ज ने कहा कि फाइनेंस बिल 2026 और चंडीगढ़ यूटी बजट 2026–27 आम नागरिक, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग के लिए कोई वास्तविक राहत प्रदान नहीं करते। उन्होंने कहा कि यह बजट और विधेयक केवल बड़े कॉरपोरेट और उच्च आय वर्ग को लाभ पहुँचाने के लिए बनाए गए हैं, जबकि आम जनता पर बोझ लगातार बढ़ाया गया है।
विक्रांत ए. तंवर ने बताया कि फाइनेंस बिल 2026 में पुराने आयकर स्लैब ज्यों-के-त्यों रखे गए हैं। ₹2.5 लाख, ₹3 लाख और ₹5 लाख की बेसिक छूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे सैलरी वर्ग, निजी कर्मचारी, दुकानदार और पेशेवर वर्ग को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला। ऊपरी स्लैब पर 20 से 30 प्रतिशत टैक्स, साथ में 10 से 37 प्रतिशत अधिभार और 4 प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर का बोझ मध्यम वर्ग पर अत्यधिक पड़ता है, विशेष रूप से ₹10 से ₹20 लाख वार्षिक आय वालों पर।
उन्होंने कहा कि अधिभार और उपकर की संरचना पूरी तरह से "अत्यधिक संपन्न वर्ग के अनुकूल और मध्यम वर्ग के खिलाफ" है। व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए अधिभार की दरें इस प्रकार हैं — ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक 10 प्रतिशत, ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ तक 15 प्रतिशत, ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ तक 25 प्रतिशत तथा ₹5 करोड़ से अधिक आय पर 37 प्रतिशत। वहीं पूंजीगत लाभ और लाभांश पर अधिभार केवल 15 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है, जिससे उच्च आय वाले निवेशकों को संरचित राहत मिलती है और वेतनभोगी वर्ग पर बोझ बना रहता है।
फाइनेंस बिल 2026 में विदेशी संपत्ति से संबंधित खुलासों पर छोटे करदाताओं के लिए 30 प्रतिशत टैक्स और 100 प्रतिशत तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के कमाई करने वाले, पेशेवर तथा एनआरआई पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जबकि बड़े कॉरपोरेट और अति-धनाढ्य वर्ग सुरक्षित बने रहते हैं।
न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) को अंतिम कर बनाया गया है और इसकी दर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत की गई है, लेकिन मैट क्रेडिट के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। घरेलू कंपनियों के लिए क्रेडिट उपयोग हर वर्ष अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित है और विदेशी कंपनियों के लिए भी यह केवल सीमित अवधि तक ही मान्य है।
सिक्योरिटीज लेन-देन कर (एसटीटी) में भी बढ़ोतरी की गई है। विकल्प प्रीमियम पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत, क्रियान्वयन पर 0.125 प्रतिशत से 0.15 प्रतिशत और फ्यूचर्स पर 0.02 प्रतिशत से 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे छोटे निवेशकों और व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, जबकि बड़े एल्गोरिदमिक और विदेशी निवेशकों पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।
सीमा शुल्क में खाद्य पदार्थों, मेवों, फलों, रसायनों और औद्योगिक सामग्री पर बढ़ोतरी की गई है, जिससे आयात महंगा होगा और महंगाई बढ़ने की आशंका है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में केवल तकनीकी सुधार किए गए हैं, लेकिन चंडीगढ़ के व्यापारी, एमएसएमई और सेवा प्रदाताओं को कोई वास्तविक दर कटौती या अनुपालन में सरलीकरण नहीं मिला है।
विक्रांत ए. तंवर ने कहा कि अनुपालन और अभियोजन में "अपराध-मुक्ति" दिखाने के बावजूद टीडीएस, टीसीएस, रिटर्न, क्रिप्टो रिपोर्टिंग और वित्तीय विवरणों पर कई स्तर के दंड बनाए रखे गए हैं। अद्यतन रिटर्न पर 25 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स और नोटिस के बाद 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स ईमानदार लेकिन असंगठित करदाताओं के लिए अत्यंत कठोर है।
चंडीगढ़ यूटी बजट 2026–27 में कुल बजट घटा दिया गया है।
वर्ष 2025–26 में संशोधित अथवा वास्तविक व्यय ₹6,187 करोड़ था, जबकि वर्ष 2026–27 के लिए बजट ₹5,720 करोड़ रखा गया है। यानी ₹467 करोड़ (लगभग 7.5 प्रतिशत) की सीधी कटौती की गई है। महंगाई, वेतन वृद्धि और शहरी दबाव के बावजूद बजट में कटौती अत्यंत चिंताजनक है।
स्थापना और प्रशासनिक खर्च कुल बजट का लगभग 66 प्रतिशत है, जबकि विकास और नागरिक सेवाओं के लिए उपलब्ध राशि में भारी गिरावट आई है। नगर निगम चंडीगढ़ के लिए कोई अलग और स्पष्ट बजट प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे सड़क, ड्रेनेज, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएँ प्रभावित होंगी।
पूंजीगत व्यय यूटी स्तर पर बेहद सीमित रखा गया है और नगर निगम को कोई सीधी पूंजीगत फंडिंग नहीं दी गई है। इससे बुनियादी ढांचे के विकास पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि आयकर स्लैब को तुरंत मुद्रास्फीति के अनुरूप संशोधित किया जाए, बेसिक छूट कम से कम ₹5 लाख की जाए, 37 प्रतिशत सुपर अधिभार समाप्त किया जाए, अप्रत्यक्ष करों से महंगाई का बोझ कम किया जाए तथा एमएसएमई और छोटे व्यापारियों को वास्तविक राहत दी जाए।
साथ ही नगर निगम चंडीगढ़ के लिए अलग, पारदर्शी और सूत्र-आधारित अनुदान तथा समर्पित पूंजीगत फंडिंग सुनिश्चित की जाए।