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Sunday, 12 July 2026

सत्संग से मिलता है विवेक और जीवन को सही दिशा: श्री हरि जी महाराज

By 121 News
Chandigarh, July 12, 2026:-ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 39 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में श्री महावीर मंदिर मुनि सभा (साधु आश्रम), सेक्टर-23, चंडीगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक समारोह के दूसरे दिन कथा व्यास श्री हरि जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्संग का महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग के बिना विवेक की प्राप्ति नहीं होती और भगवान श्रीराम की कृपा के बिना सच्चा सत्संग भी प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि सत्संग ही आनंद और कल्याण का मूल आधार है तथा यह मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।

अपने प्रवचनों में श्री हरि जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार पारस के स्पर्श से लोहा स्वर्ण के समान मूल्यवान बन जाता है, उसी प्रकार सत्संग का प्रभाव मनुष्य के जीवन को भी बदल देता है। उन्होंने कहा कि दुष्ट प्रवृत्ति का व्यक्ति भी सत्संग की संगति पाकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से सत्संग में भाग लेना चाहिए।

उन्होंने श्री हनुमान जी महाराज की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि उनका प्रताप सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग—चारों युगों में विद्यमान रहा है। विशेष रूप से कलयुग में श्री हनुमान जी महाराज शीघ्र कृपा करने वाले और भक्तों के कष्टों का निवारण करने वाले देव हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम से अजर-अमर होने का आशीर्वाद प्राप्त होने के कारण श्री हनुमान जी आज भी अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। श्री हनुमान जी की भक्ति से जीवन में श्रद्धा, शक्ति, साहस और भक्ति का प्रकाश फैलता है।

इस अवसर पर कथा व्यास श्री हरि जी महाराज ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने 'ले चल अपनी नगरिया', 'शंकर ने खुद लिखी श्रीराम की कहानी.', 'मुख बोलता है या तू बोलता है', 'मेरा दिल तुझपे कुर्बान मुरलिया' तथा 'गले से लगा लो न मुझे सांवरिया' जैसे सुंदर एवं भक्तिमय भजनों का गायन किया। भजनों के दौरान पूरा पंडाल भक्ति रस में सराबोर हो गया और श्रद्धालु भगवान के जयकारों के साथ भक्ति में लीन होकर झूम उठे।

इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पधारे संत-महात्मा भी समारोह में उपस्थित रहे। मंदिर के प्रधान दलीप चंद गुप्ता एवं सांस्कृतिक सचिव पं दीप भारद्वाज ने सभी संत-महात्माओं का अंग वस्त्र पहनाकर एवं सम्मान पूर्वक स्वागत किया।

समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने सत्संग श्रवण कर आध्यात्मिक वातावरण का लाभ उठाया और ब्रह्मलीन श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
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