By 121 News
Chandigarh 19th July:- हरियाणा-पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि समाज की धारणा कानून के डर से नहीं ऋषि-मुनियों से मिले संस्कारों से अच्छी बनती है। लोग अच्छे होंगे तो सरकारें भी अच्छी बनती हैं क्योंकि सरकार में लोगों का ही डी.एन.ए. विद्यमान होता है। अच्छे लोग पैसे का भी सदुपयोग करते हैं और उनका व्यक्तित्व भी अच्छा व प्रभावशाली होता है। लेकिन यह सब गुरूओं के सानिध्य में ही होता है। इसलिए सबको गुरूजनों की शरण में आकर उनके उपदेशों पर अमल करना चाहिए।
यह बात आज हरियाणा व पंजाब के राज्यपाल और चण्डीगढ के प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने सेक्टर 27 में दिग बर जैन मंदिर परिसर में मुनिश्री तरूण सागर जी महाराज के चातुर्मास के दौरान उनके दर्शन करने के बाद अपने स बोधन में कही। इस अवसर पर उन्होंने मुनिश्री के प्रवचनों के संकलन 'कड़वे प्रवचनÓ के एक्सपोर्ट संस्करण का विमोचन किया। उन्होंने औरंगाबाद के द पति जितेन्द्र गंगवाल और अभिलाषा गंगवाल को गुरूसेवा अवार्ड से और गुरू परिवार, दिल्ली को सर्वश्रेष्ठ इकाई अवार्ड से स मानित भी किया।
प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मुनिश्री तरूण सागर जी महाराज के कड़वे प्रवचन किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे मानव समुदाय के लिए हैं। उनके कड़वे प्रवचन राजनेताओं के लिए तो अमूल्य दवाई हैं जो इनका अनुसरण कर पूरे समाज का हित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज का कल्याण करते हैं वे देवता होते हैं और इसके विपरीत करने वाले दानव होते हैं। मानव को यदि दानव न बनकर देवता बनना है तो गुरूजनों के प्रवचनों को अनुसरण करना होगा।
इससे पहले राज्यपाल ने धर्मध्वजारोहण किया और मुनिश्री तरूण सागर जी महाराज को श्रीफल भेंट किया।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने मुनिश्री का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि मुनिश्री के आने से चंडीगढ़ की भूमि स्वर्ग बन गई। जहां-जहां भी उनके चरण पड़े वे धरती एवं वहॉं के लोगों का जीवन सफल हो गया।
इस मौके पर हरियाणा की शहरी निकाय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती कविता जैन ने मुनिश्री का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि कि गुरू बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। गुरू ही हैं जो हमें सही दिशा व हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें समय मिलता है वह मुनि श्री के दर्शन करने व उनका आर्शीवाद प्राप्त करने जरूर जाती हैं।
गुरू पूर्णिमा के शुभ अवसर पर जैन मुनि श्री तरूण सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को स बोधित करते हुए कहा कि मुनष्य को दो चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए एक तो क्रोध व दूसरा अहंकार। यह दोनों चीजें मनुष्य के जीवन को नर्क बना देती हैं। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता उसे नींद से उठाने की जरूरत पड़ती है लेकिन जिसके पास धन होता है उसे सुलाने के लिए नींद की गोलियां देनी पड़ती है। इसलिए धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिये। उन्होंने कहा कि हमें गुरू का हाथ नहीं पकडऩा चाहिए बल्कि गुरू को अपना हाथ पकड़ाना चाहिए क्योंकि मुश्किल समय में हम गुरू का हाथ छोड़ सकते हैं लेकिन गुरू हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगा।
आए हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए दिग बर जैन सोसायटी के प्रधान नवरत्न जैन, चातुर्मास कमेटी के प्रधान धर्म बहादुर जैन व महासचिव कैलाश चंद जैन ने कहा कि आज वे धन्य हैं कि चंडीगढ़ शहर में जिस हिसाब से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, उससे साफ जाहिर है कि जैन ही नहीं अन्य सभी धर्मों के लोग भी महाराजश्री के कड़वे वचन सुन आनंद विभोर हो रहे हैं।
No comments:
Post a Comment